धत जमाने धत तेरे की-  ख्याति 

“मेरी बनाई हुई तलवार ढाल और भाले को चलाकर सम्राट कितने प्रसिद्ध हो गए ..प्रभु मुझे तो कोई नहीं जानता ..”  उसके कठोर तप से प्रकट हुई दिव्य ज्योति के सामने वह रुदन करता हुआ बोला 

“तब तो तुम्हे स्वयं ही अपने  हथियार  चलाने  चाहिये ” दिव्य ज्योति से गम्भीर स्वर फूटे 

“ठीक है प्रभु ..मैं स्वयं अपने शस्त्र प्रयोग करूँगा ..लेकिन मेरा तो कोई शत्रु भी नहीं प्रभु , मैं किस पर प्रहार करूँ ..” 

“शत्रु होते नहीं , बनाए जाते हैं ..”  

“वो भला कैसे ..?” 

“किसी पर भी प्रहार कर ..उसके मित्र तुम्हारे शत्रु हो जाएंगे जिन पर शेष जीवन प्रहार करते रहना और उसके शत्रु तुम्हारे मित्र हो जाएंगे जो तुम्हारा बचाव करेंगे ..तुम केंद्र में रहोगे और ख्यात भी , बस विख्यात या कुख्यात के चक्कर में मत पड़ना ..” 

“जैसी आपकी आज्ञा प्रभु ”  

अगले कुछ ही दिनों में उसने एक असावधान घुड़सवार का आखेट कर लिया और उस घुड़सवार के शत्रुओं और मित्रों के आपसी रसायन से वह चर्चित व्यक्तित्व बन गया |  वह अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में ख्यात एवं चर्चित रहा और समय आने पर मृत्यु को प्राप्त हुआ  | 

                    इस घटना के सदियों बाद आधुनिक युग में उसका पुनर्जन्म हुआ | उसमें ख्याति की महत्वाकांक्षा अब भी प्रबल थी |इस हेतु उसने पुरानी विधियाँ उपयोग ली किन्तु मनोरथ पूर्ण न हुआ अपितु कई कई बार घोर पीड़ाओं से सामना हुआ और चिकित्सालय में समय व्यतीत करना पड़ा , न्यायालय की प्रक्रियाओं से दो चार होना पड़ा और अधिवक्ताओं ने भी भारी आर्थिक पीड़ाएं दी | उसने इस हेतु पुनः कठोर तप किया | उसके तप से प्रशन्न होकर दिव्य ज्योति पुनः प्रकट हो गई थी ..

“प्रभु अब तो नियम बहुत कठोर है ..” 

“मूर्ख जीव ..” दिव्य ज्योति भड़ककर बोली  “…अब तो अत्यन्त सरल है ..” 

“कैसे प्रभु ..मै तो हार गया ..सब जतन कर लिये पर मूँह की खानी पड़ी  अंतिम प्रयास में एक बरस पहले पुराने तरीके से एक मोटरसाइकिल सवार को रोक कर सिर्फ दो झापड़ ही लगाई थी ..उसके एक सप्ताह बाद जमानत हुई  ..अंदर रुई की तरह से मुझे धुना गया सो अतिरिक्त …इस युग में ख्याति अर्जित करने  के रहस्य का वर्णन करें प्रभु ” वो गिड़गिड़ाया 

“ह्म्म्म ..इसका अर्थ है कि तुझे इस युग की नवीन तकनीको का ज्ञान नहीं ..तूँ आलोचनास्त्र का प्रयोग कर  वत्स ..” दिव्यज्योति ने रहस्य खोला 

“वो कैसे प्रभु ..?” 

“किसी की भी आलोचना कर ..किसी राजनेता की, किसी धर्म की ,किसी चलचित्र की , किसी साहित्यकार की रचना की ..किसी की भी ..पर ध्यान रहे केंद्र में रहना चाहता है तो केन्द्रस्थ विषयवस्तु को ही शिकार बनाना ….”  

“पर प्रभु मैं तो अज्ञानी हूँ मुझे किसी विषय का कोई ज्ञान नहीं है और आलोचना के लिये तो अध्ययन अत्यंत आवश्यक है ..” वो बिलबिलाया 

“नहीं वत्स तुम्हे आधुनिक युग का ज्ञान नहीं है ..अब आलोचना के लिये अध्ययन की अनिवार्यता समाप्त हो चुकी है ..तुम किसी को भी गाली दे सकते हो अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता है,  इसके लिए बाकायदा सामाजिक संचार माध्यम बन गए हैं .जो तुम्हे ख्यात व्यक्तित्व बना देंगे ”  दिव्यज्योति इतना कह कर  लुप्त हो गई और वो अब आधुनिक युग में ख्यात होने को आलोचनास्त्र के ज्ञान से युक्त था, उसका ख्यात होना अब कुछ ही समय की बात थी | 

                   सबसे अच्छी बात उसके पक्ष में जो थी वो यह थी कि इस  युग में  कुख्यात  और विख्यात का  फर्क भी लगभग  समाप्त हो  चुका  था  | 

Avinash Vyas

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