जाहिल 

“आओ मिएँ , आज पूरे दो दिन से नज़र आए हो ..कहाँ में थे इत्ते दिन ” पंडित हरिनारायण शर्मा के झुर्रीदार चेहरे पर रौनक आ गई थी 

“अबे शरमे तेरी तरह पेंशन नहीं आती मेरी ..दुकानदारी है दुकानदारी ..दौड़ना पड़ता है ” अशरफ अली चेहरे पर आए पसीने को कंधे पर रखे तौलिये से पौंछता हुआ कुर्सी पर ढेर हो गया | 

शर्मा जी अपने बचपन के दोस्त अशरफ को देखकर उठे और कूलर चला दिया | 

“बड़े आए दुकानदारी वाले .. सारा काम मेरा भतीज बादशाह इक़बाल देखता है ..तूँ तो डिस्टर्ब ही करता है उसे ..”  कहते हुए शर्मा जी ने टीवी का बटन ऑन कर दिया |  टीवी पर गरमा गरम बहस चल रही थी और विषय था  हिन्दू राष्ट्र |  

“अबे मिये ..देख हिन्दू राष्ट्र घोषित हो रहा है ..बोरिया बिस्तर बांध ले ..”  शर्मा जी ने ठहाका लगाया 

“हाँ पड़ौस में मुस्लिम राष्ट्र है और वहां मुसलमान निहाल हुए बैठे हैं तो तुम यहां हो जाना स्सालों ..” 

“अबे तुम तो हो ही बाहरी बोले तो आउटसाइडर ..” 

” बकवास मत कर बामण ..रूह अफज़ा शर्बत के साथ बिस्किट आने दे ..और देख कूलर में पानी कम लग रहा है ..” 

” बहु .. | ”  शर्मा जी ने कदरन तेज स्वर में आवाज लगाई   “मियां आया है शर्बत और बिस्किट ला देना ” 

फिर चश्मा उतार कर कूलर के अंदर झाँका और बोले

“मिये.. दौड़कर पानी का पाईप ले आ, कूलर खाली पड़ा है ”  

“अबे मैं मेहमान हूँ नाकारा सरकारी पेंशनर , मुझी से काम करवाएगा !”  भुनभुनाते हुए वो उठ कर  आंगन में से पाईप उठा लाये | 

कूलर में पानी भरा तब तक शर्मा जी की बहू दो गिलास शर्बत और बिस्किट की प्लेट रख गई थी | 

” अबे शरमे ..ये दो कौड़ी के बिस्किट कहाँ से लाया बे ? ” बिस्किट मूँह में रखता हुआ वो भड़का 

“अबे खा ले यार ..” 

“नहीं खाता ये कचरा ..” अशरफ मियां तुनक कर बोले 

“..चल तेरे लिये अभी क्रीम वाले बिस्किट लाता हूँ ..स्साला बुढ़ापे में भी क्रीम वाले बिस्किट खाता है मरदूद कहीं का ..”  उठते हुए शर्मा जी भूनभुनाए

“अबे छोड़ शरमे ..पैसे खर्च करने के नाम पर तेरी जान निकलती है ..”  अशरफ मियां ने उनका हाथ पकड़ कर बिठा दिया 

तभी टीवी पर चल रही बहस में शायद कुछ जोरदार मोड़ आ गया और दोनों का ध्यान टीवी बहस पर केंद्रित हो गया | 

               टीवी की बहस में किसी हिन्दू नेता ने कहा कि मैं कहता हूँ अल्लाहो अकबर और ख़ड़े होकर एक मियां जी को जय श्री राम बोलने को ललकारा ,  लेकिन मियां जी ने जय श्री राम नहीं बोला बल्कि नेताजी को हाथ पकड़ कर बिठा दिया |  मौहाल तीखा और ठंडा होगया था | 

“जय श्री राम ”  अशरफ मियाँ मुँह में बिस्किट डालते हुए बड़े आराम से  शर्मा  जी से सम्बोधित हुए  |

“अल्लाहो अकबर ..” शर्मा  जी ने उसी रौ  में  जवाब दिया |  दोनों अट्टहास करते हुए हंस पड़े |   शर्मा जी ने टीवी ऑफ़ कर दिया |   दोनों में कितनी ही देर तक एक दूसरे की कंजूसी और नाकारापन पर  नोकझोक चलती रही | महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे से होते हुए चर्चा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चली गई |  

                  दोनों  ही  अपने  अपने धर्म के विशेष जानकार  नहीं  लगते थे |  मूर्खों की तरह प्रेम से  जिए थे और जितना जी चुके थे  उतना जीना अब बाकी भी नहीं था | 

                   जाहिल कहीं के ..

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