​धत जमाने धत तेरे की 

                    अभी कुछ ही समय हुआ जब जंगल में शेर को सदियों से राज करते देख एक बंदर ने धरना प्रदर्शन  प्रारम्भ  कर दिया |  बन्दर ने  शेर के राज में होने वाले अत्याचार गिनाए और सब जानवरों को बताया कि लोकतंत्र का असली मतलब मुफ्तखोरी है |  उसने अपनी पार्टी बनाई और चुनाव भिड़ गया |  चुनाव में बन्दर जीत गया और जंगल का राजा घोषित हुआ | 
                   एक दिन वह किसी पेड़ की डाल पर बैठा था तब एक बकरी रोती हुई आई और उसने गुहार लगाई कि उसके बच्चे को भेड़िया उठा कर ले गया है जिसे जल्दी बचाया जाय |  बन्दर तुरन्त हरकत में आ गया और उसने एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलांग लगा दी |  वो इतने में ही नहीं रुका बल्कि उस पेड़ से तीसरे पेड़ पर छलांग लगाता हुआ वापिस उसी पेड़ पर आ गया |  अब उसने लगातार छलांगे लगाना शुरू कर दिया |  बकरी काफी देर देखती रही फिर परेशान होकर बोली कि महाराज आप मेरे बच्चे को बचाइए वरना भेड़िया उसे फाड़ खायेगा | बन्दर ने ठिठक कर तुरन्त डाँट मारते हुए जवाब दिया ”  ” देख बकरकी !  जीना मरना ऊपरवाले के हाथ में है , मेरी दौड़ भाग में कोई कमी हो तो बता ”    बकरी बेचारी निरुत्तर थी  |  यह जंगल की बात है तो जंगल तक रहे दिल्ली वाले दिल पर न ले  |  

                     लेकिन अब एक नया मुद्दा यह  हो गया था कि बन्दर क्या सिर्फ बन्दरिया को ही महिला सम्मान देगा बकरी को नहीं ?    क्या वह महिला सम्मान की अधिकारी नहीं ?  जब यह मुद्दा उस घटनाक्रम को देखते चूहे ने उठाया तो बन्दर ने मनुष्य समाज से आई इस रीति का भली भाँति अध्ययन करने के लिये एक सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया जिसका अध्यक्ष उसी चूहे को बना दिया गया |   चूहे ने तुरंत कार्य प्रारंभ कर दिया और शहर शहर घूम कर मनुष्य जाती का अध्ययन किया और नियत समय पर रिपोर्ट बन्दर के समक्ष प्रस्तुत कर दी |  

                   उसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि महिला शब्द का प्रयोग और इस से जुडी गरिमा के अध्ययन के लिये पहले मनुष्यों में आर्थिक वर्गीकरण को समझना आवश्यक है |  तीन तरह के मनुष्य पाए जाते हैं जो कि क्रमशः निम्न वर्ग, मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग में वर्गीकृत है |  वहाँ पर मध्यम वर्ग में पुनः तीन श्रेणियां हैं जोकि क्रमशः निम्न मध्यम वर्ग , मध्यम मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग में विभाजित है |  यह जो महिलाओं के सम्मान की बात है यह इसी मध्यम वर्ग पर लागू है | मनुष्यों के शेष वर्ग की नारियों को महिला सम्मान का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है  | 

                 निम्न वर्ग की महिलाएं जो निर्माण श्रमिक है, घरेलू नौकरानियां हैं या फुटपाथ पर छोटा मोटा सामान सब्जी इत्यादि बेचती हैं या कि जो अत्यन्त निम्न हैं  भिक्षावृति करती हैं , उनको कोई सम्मान प्राप्त नहीं है, न तो महिला होने का न हीं मनुष्य होने का |

                         दूसरा वर्ग है उच्च वर्ग , इस वर्ग की महिलाएं अत्यन्त सम्मान प्राप्त करती है लेकिन वो सम्मान महिला सम्मान न होकर उनके धन का, ग्लैमर का  सम्मान होता है जो कि उनके सामने ही किया जाता है |  पीठ पीछे उन पर टिप्पणियाँ करते समय उनकी महिला होने की विशेषता को ही रेखांकित किया जाता है , इनके चरित्र पर भी बेजा टिप्पणियां की जाती है |  इस वर्ग में धनाढ्य उद्योगपतियों के घरों की स्त्रियां, राजनेत्रियां, अभिनेत्रियां इत्यादि शामिल है | वैसे इस वर्ग की महिलाओं में स्वयं में भी महिला सम्मान प्राप्ति के लिये न तो विशेष रूचि ही होती है और न परवाह |  

                          रिपॉर्ट के दूसरे भाग में चूहे ने जो बात बताई वो जंगल के किसी जानवर को कतई समझ नहीं आई कि मनुष्यों में स्त्रियां ही स्त्रियों की सबसे बड़ी दुश्मन है |  चूहे ने बताया कि स्त्रियां शिशु कन्या को जन्म ही नहीं देना चाहती |  स्त्रियों द्वारा स्त्रियों की दहेज हत्या में भागीदारी , कन्या भ्रूण हत्या इत्यादि बातें चूहे की गफलत में की गई स्टडी मानते हुए ख़ारिज कर दी गई , क्योंकि जंगली जानवरों की दृष्टि में ऐसा सम्भव ही नहीं था |  

                  अंततः बकरी को यथोचित महिला सम्मान के योग्य माना गया क्योंकि जंगल में कोई आर्थिक या बौद्धिक वर्गभेद नहीं था | लेकिन उसके लापता बच्चे की बात इस सारी कवायद में ठंडे बस्ते में चली गई |

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