● श्राद्ध ●

कनागत चल रहा था |  
दूज का चाँद चमक रहा था |  दूर तक नीरवता पसरी थी |  वो अपने घर के सामने के पीपल के पेड़ पर बेचैन सा बैठा था | उसने देखा कि लालाराम हलवाई जो कि उनका घरेलू हलवाई था, धोती सम्हालता हुआ अभी अभी उसके सामने ही घर में घुसा था |   उसने सोचा कि कल जरूर पिंटू बढ़िया से बढ़िया भोजन का प्रबंध करेगा,  उसका पहला श्राद्ध जो था |  उसे विश्वास था क्योंकि उसकी पत्नी गायत्री लगभग 30 साल उसके साथ रहकर भी आस्तिक और धर्मभीरु महिला थी | भूख और प्यास से तड़पती उसकी आत्मा को कुछ उम्मीद नज़र आई थी | 

                कुछ देर ही हुई होगी कि उसे घर से निकल कर आते हुए दो साये नज़र आये | पिंटू घर से निकल कर पीपल के पास तक लालाराम को छोड़ने आया हुआ था 

“देखो लालाराम अंकल यह सब करना पड़ता है वरना..मम्मी और रेणु घर में कलह मचा देती .. आपको तो पता ही है पापा तो कॉमरेड थे ,  उन्होंने तो दादाजी का श्राद्ध कभी किया ही नहीं ..मुझे तो समाज में रहना है तो कुछ तो दिखावे को करना ही है ऊपर से रेणु भी मानती नहीं ..वहां मम्मी के और रेणु के सामने जो कुछ कहा उसे भूल जाइए वो तो भावुक औरतें  हैं ..आप तो कल के लिये बीमार हो जाना और मैं बाजार से कुछ सस्ते से पेड़े लाकर काम निकाल दूंगा ..हालाँकि भगवान का दिया सब कुछ है और पापा भी बहुत कुछ छोड़ गए थे ..पर सब कुछ फिजूलखर्ची में उड़ाने को थोड़े ही है  .और अभी जो कुछ अंदर औरतों ने  डिसाइड किया था यह मेनू अगले हफ्ते के लिये फाइनल रखना ..अपने विक्की की बर्थडे पार्टी के लिये ..” 

“अगर बुरा न लगे तो एक सस्ता तरीका है ..कल सेठ दीनानाथ जी के श्राद्ध में बचे हुए गुलाब जामुन और मोतिपाक मैंने कौड़ियों के भाव उठा लिए थे..कहो तो उसमें से भिजवा दूँ ..?”  लालाराम ने सलाह दी 

“अरे..नेकी और पूछ पूछ ..”  पिंटू अत्यन्त उत्साहित स्वर में बोला और दोनों ठहाका मार कर हंस पड़े | 

वार्ता सुनकर  उस पर गहरी निराशा हावी हो चली थी ..अचानक भगवान की आरती और घण्टी की आवाज सुनाई दी ..वो भयभीत हो उठा और अचानक वो पीपल से नीचे गिर पड़ा 

“…अरे पिंटू देख तेरे पापा को क्या हो गया ..पलंग से गिर पड़े हैं ..बेहोश लग रहे हैं ..”  गायत्री की चीखती हुई आवाज उसे  किसी गहरे कुए में से आती हुई लगी .अचानक किसी ने उसे झंझोड़ दिया .. वो हड़बड़ा कर उठ बैठा ..उसने आँखे खोल कर देखा कि वो  नींद में पलँग से नीचे गिरा पड़ा था और पूरा शरीर पसीने से भीग गया था ..लेकिन राहत की लंबी सांस ली ..वो एक सपना था |  पत्नी गायत्री और पुत्र पिंटू घबराये से उसके पास ही बैठे थे जबकि उसकी पुत्रवधु रेणु हाथ में पूजा की घण्टी लिये दरवाजे पर खड़ी थी 

“गायत्री ..बाउजी का श्राद्ध कब आता है ..?”  उसने पिंटू के हाथ का सहारा लेकर उठते हुए पूछा |  पिंटू, गायत्री और रेणु आश्चर्यचकित से उसे देख रहे थे |

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