● वात्सल्य ●

नन्हा सा दीपक बहुत खुश था और बिस्तर पर लेटा नींद लेने की कोशिश कर रहा था |  वो सोच रहा था कि कल शाम को  चाचा जब घर आए थे तो कितने  दुःखी थे |  उन्होंने आते ही जब चाची से बात की तो चाची भी कितना फूट फूट कर रोई थी  | पता नहीं क्या हो गया था |  रात को खाना भी नहीं बना था |  लेकिन शुबह से तो सब कुछ बदल गया था |   चाची ने कितना प्यार से उसे नींद से उठाया था | फिर खुद अपने हाथों से नहलाया भी | चाचा चाची उसे कपड़ों के शो रूम में भी ले गए थे |  कितने प्यार से चाची ने उसके लिये कपड़े पसंद किए थे |  एक एक ड्रेस उसने  पहन कर  देखी थी |  सब एक से बढ़ कर एक  |  फिर होटल में खाना भी खाया था |  चॉकलेट खिलौने और पता नहीं क्या क्या |  आज उसे माँ की याद भी नहीं आ रही थी क्योंकी चाची उसे आज वैसे ही प्यार से दुलार रही थी जैसे कभी माँ दुलारा करती थी |  आज रात को चाची ने खाना परोसते समय एक बार भी गुस्सा नहीं किया था और रोटी पर कितना सारा घी और चीनी डाल कर दी थी , बिलकुल माँ की तरह |  और अभी अभी  कितना प्यार से चूम कर सुला गई थी |  उसको लगा वो ही समझ नहीं पाया था और समझता था कि चाची गन्दी है पर वो तो बहुत अच्छी है बिलकुल माँ जैसी | सोचते सोचते उसे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला | 

               दस साल का दीपक सुनील के भाई मुकेश का बेटा था |  दो साल पहले एक सड़क हादसे में मुकेश और उसकी पत्नी का देहांत हो गया था | तब से ही वो सुनील के पास ही रहता था |  सुनील की शादी छह साल पहले हुई थी लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी | कल ही उसे यह हृदय विदारक जानकारी हुई थी जिसे उसने घर आकर भारी दिल से पत्नी को बताया था |   कल शाम को वो अपनी और अपनी पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट्स लेकर डॉक्टर से मिलने गया था |  डॉक्टर ने मेडिकल रिपोर्ट देख कर बताया था कि उसकी पत्नी ऋतू के माँ बनने की कोई सम्भावना नहीं थी |

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