● भाग्य रेखा ●

सत्यप्रकाश  सिनेमा हॉल का यह ऑनर्स चेम्बर था | उस बड़े से हॉल जैसे चेम्बर में विशाल टेबल के एक तरफ चमड़े से मढ़ी लग्जरी चेयर पर सिनेमा हॉल का वारिस डॉ0 प्रकाश कोचर बैठा था और दूसरी तरफ विजिटर्स चेयर पर सेठ सुमतिदयाल मित्तल अपने पूरे वैभव के साथ आसीन थे | 

“नहीं मित्तल साहब ..मुझे आपके प्रस्ताव में कोई रूचि नहीं है …दीवानगी की हद तक जाकर बनाए गए इस सिनेमा हॉल में मेरे पिता की यादें बसी हैं और इसके अलावा पापा के साथ सुख दुःख में हमेशा साथ रहे सिनेमा के स्टाफ को बेरोजगार नहीं कर सकता …आई एम सॉरी .. ”  डॉ0प्रकाश कोचर  ने  निर्णायक स्वर  में कहा | 

“तुम्हारी मर्जी ..लेकिन मेरा प्रस्ताव हमेशा रहेगा जब कभी बेचने का निर्णय करो तो मुझ से सम्पर्क जरूर करना ..”  उठते हुए सेठ सुमतिदयाल मित्तल ने पिछले एक घण्टे से चल रही मीटिंग का पटाक्षेप करते हुए कहा और चले गए | 

                   प्रकाश दो साल पहले तक लन्दन में एक हॉस्पिटल में हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत था लेकिन अपने पिता व्योमकेश जी के निधन पश्चात उसे भारत आना पड़ा |  यहां उनका एक सिनेमा हॉल था जो कभी किनारे पर रहा होगा लेकिन अब बढ़ते शहर के मध्य आ चुका था और जाहिर है कि उस जमीन की कीमत अब करोड़ों में थी लेकिन मल्टीप्लेक्स के इस दौर में वो सिनेमा हॉल अप्रासंगिक हो चुका था |   मित्तल साहब उसी सिनेमा हॉल को खरीद कर  मॉल बनाना चाहते थे |  

                     यद्यपि  मित्तल साहब कि कही बात उसे सौ प्रतिशत सही लगी थी कि इतनी काबिलियत और अनुभव के बावजूद उसे उस नामचीन हॉस्पिटल में नौकरी करनी पड़ रही थी ..अगर मित्तल साहब का प्रस्ताव मान लिया जाता तो वो अपनी स्वयं की मल्टीस्पेश्यलिटी हॉस्पिटल खोल सकता था जो उस शहर की सबसे बड़ी हॉस्पिटल होती |  लेकिन उसे ताज्जुब था कि वो चाहकर भी हाँ नहीं कह सका |  

                       उसने अपने दाएं हाथ की हथेली को गौर से देखा .. उसे डॉ0 महेश त्रिवेदी की कही बात याद आ रही थी ..” तुम्हारी भाग्यरेखा जो है वो माइंड लाइन को तो पार कर गई पर हार्ट लाईन पर अटक गई है .. इसका मतलब यह है कि तुम  हार्ट से   डिसीजन  करोगे ..   और नुकसान में रहोगे ..” 

“हा हा हा ..हार्ट से डिसीजन ..कार्डियोलोजी पूरी पढ़ ली और सैकड़ो हार्ट खोल के देख लिए  पर वहां कहीं सोचने या डिसीजन लेने वाली डिवाइस नहीं दिखी ..डॉ0 त्रिवेदी   !  हार्ट सिर्फ एक पम्पिंग मशीन है जो ब्लड सर्कुलेट करने का काम करता है ..”

” यहाँ हार्ट का आशय ब्रेन के उस हिस्से से है जो भावनात्मक विचार पैदा करता है ..” 

“देखो त्रिवेदी ..आदमी सुविधाएं जुटाता है अपने दिमाग से लेकिन उनका आनंद तो भावनाओं से ही लिया जाता है ..अगर हार्ट लाईन भावनाओं की लाईन है तो उसे रौंद कर जुटाई गई सुविधाएं भला आनन्द कैसे देगी  ..यह तो खजाने की रक्षा करने वाले नाग जैसा जीवन होगा  शुक्रिया करता हूँ भगवान का कि मेरे हाथ में यह व्यवस्था है ..” 

                   अचानक कमरे की बत्ती गुल हो गई  उसे धुप्प अँधेरे में कुछ नजर नहीं आ रहा था ..कुछ चर चर्राहट के साथ चेम्बर के गेट खुलने की आवाज आई साथ ही काफी लोगों की पदचाप ..अचानक टेबल पर कुछ रखने की आवाज के साथ कमरे में प्रकाश भर गया तेज कोलाहल की तरह आवाजें गुंजी 

“हैप्पी बर्थ डे टू यू …” 

स्त्री पुरुष आवाजों के साथ नन्हे बच्चों की आवाजें ..पूरा चेम्बर भरा हुआ था ..सिनेमा स्टाफ के पूरे परिवार एक स्वर में गा रहे थे ..आगे ही आगे टिकट चेकर कान्हा बाबा पोपले मूँह से अगुवाई कर रहे थे जिनकी गोद में उनका पोता भी था .. टेबल पर बड़ा सा केक रखा गया था  जिसमें स्टेथेस्कोप बना था जो उस हृदय  पर रखा था जिस पर लिखा था .. “सत्यप्रकाश” 

डॉ0 प्रकाश की आँखों में आंसू की एक बून्द आकर ठहर गई थी .. वो अपने फैसले से अब प्रशन्न था |  रुग्ण सिनेमा हॉल के पुनरुद्धार का निवेदन उसे मिल गया था और जिसके लिये वो अब कृतसंकल्प भी था |

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