● दहेज ●

“देखो बुरा मत मानना ..पर कई बार ख़याल आता है कि तुम जैसी पढ़ी लिखी लड़की ने उस घर में शादी के लिये हाँ कैसे कर दी जिन पर दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज था ..? ” अमिता माथुर अपनी बालसखी  सुमन सिंघल के साथ रेस्टोरेंट में बैठी थी  और कॉफी पीते हुए उसी से संबोधित थी | सुमन की शादी दो साल पहले दिल्ली के एक धनाढ्य परिवार में हुई थी और आज वो अपने भाई की होने वाली शादी के लिये सपरिवार गृहनगर आई हुई थी |  उसके सास ससुर पति और जेठ जेठानी सभी साथ आए हुए थे | अमिता को वो अपने पति के साथ बाजार में खरीददारी करते हुए मिल गई थी जहाँ उसने दम्पति को  कॉफी पीने का आग्रह किया था |  सुमन के इशारे पर उसके पति एक अलग टेबल पर बैठ गए थे, उनकी आज्ञाकारिता अमिता को कुछ असामान्य लगी लेकिन सुमन को प्रशन्नचित देखकर अमिता को आश्चर्यमिश्रित प्रशन्नता हो रही थी | 

“पढ़ी लिखी थी तभी तो हाँ कर दी ..” सुमन चहक कर बोली 

“क्या मतलब ..?” अमिता हैरत में थी 

“देखो अमिता ..मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति दो साल पहले कैसी थी यह तुमसे छुपी नहीं .. छोटी सी दुकान से पिताजी की कमाई इतनी ही हो पाती थी कि हम तीन भाई बहनों का पेट बमुश्किल भर पाता था..और तुम जानती हो कि दहेज कटुसत्य है |  मेरे पति सुशील का जब रिश्ता आया तो पिताजी और माँ ने तुरंत मना कर दिया था |  उनका कहना था कि बेटी को कुँए में फेंक देंगे पर ऐसे लालची भेड़ियों से रिश्ता नहीं करेंगे  |  लेकिन काफी सोच विचार कर मैंने उनसे हाँ करवा दी …क्योंकि मुझे लगा था कि सबसे सुरक्षित घर यही है जहां मेरे जैसी मध्यम घर की लड़की बिना दहेज शादी कर सकती है ..” 

“म..मतलब ..कैसे ?” अमिता हैरान हो गई थी 

“सोचो ..समाज में उनकी इतनी थू थू हो चुकी थी कि बराबरी के परिवार उनसे रिश्ता नहीं करना चाहते थे ..मेरे परिवार की स्थिति किसी से छुपी नहीं थी… वे मजबूरीवश ही हमारे घर तक आये थे ..सामान्य बुद्धि से सोचो तो भविष्य में दहेज की मांग की कोई सम्भावना नहीं थी ..एक बार इनको जेल भिजवाने में मधु भाभी और उनके घर वालों को बहुत जहमत उठानी पड़ी थी लेकिनअब इनका रिकॉर्ड ऐसा हो चुका  था कि मेरी एक लिखित शिकायत पर ये सारे अरेस्ट होते और इस बार जमानत भी नहीं होती .. ” सुमन ने कहा तो अमिता अवाक रह गई |

“तो अब सब कुछ ठीक है ?” 

“हाँ सब ठीक है ..मधु भाभी ने कोम्प्रोमाईज़ कर लिया था ..बदले में  उनके बेरोजगार भाई को फैक्ट्री खुलवा कर दे दी गई  .. उनकी शादी को दस साल भी हो चुके थे तो अब उनको क़ानूनी प्रिविलेज भी नहीं मिलता  इसलिये.. उनकी सलाह पर मैंने भी एक लिखित शिकायत इनके खिलाफ कर दी ..दहेज उत्पीड़न की .. अब मेरे दोनों भाई  भी उद्योगपति हैं ..” वो ठहाका मार कर हँस रही थी | अमिता को उसकी हँसी पैशाचिक लग रही थी ..घृणा की तीव्र अनुभूति से कॉफी का घूँट जैसे उसके गले में अटक गया था |

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