● आभार ●

वो गर्मियों का एक आम सा दिन था |  आदर्श नगर थाने में एसएचओ सुनील बिश्नोई के सामने प्रकाश सोनी मिलने के लिये आया बैठा था जो कि तीन महीने पहले तक उसी थाने का प्रभारी रहा था जब तक कि  उसका  स्थानांतरण अन्यत्र  नहीं हो गया था | दीवार की तरफ उकडूं सा हरीश बैठा था चेहरे पर सूजन और चोट के निशान उसकी पर्याप्त खातिरदारी हो चुकने की चुगली कर रहे थे | 

“यह गुप्ता जी भी ठीक है ..उन्होंने कुल जमा चौथी बार इस पर आरोप लगा दिया है  ..छः महीने पहले बंसल हॉउस में चोरी के समय भी इन्होंने इसी हरीश का नाम दिया था ..” प्रकाश सोनी चाय का घूंट भरने के लिए रूका  “..  तीन दिन हमने इस हरीश की बैंड बजाई थी .. तब इसकी सारी हिस्ट्री मैंने खुद चेक की थी ..क्लियर रिकॉर्ड था ..”  चाय का कप रखते हुए उसने कहा  “..कालू गैंग का कारनामा निकला था वो ..इसे छोडो ..फालतू टाइम वेस्ट ही होगा ..” 

                 

                    तकरीबन चार साल पहले  गुप्ता जी और उनका परिवार देर रात किसी शादी समारोह से लौटे तो उनकी कोठी का ताला बंद था |  वॉचमेन छुट्टी पर था और वो चाभियाँ कहीं भूल आए थे | हरीश तब फैक्ट्री में नाईट शिफ्ट के लिये जाता हुआ उनको परेशान देखकर रुक गया |  उनके अनुरोध पर वो तीन किलोमीटर वापिस जाकर अपने घर पर रखा चाभियों का गुच्छा और कुछ औजार उठा लाया था जो कि तब से उसके पास पड़े थे जब वो ताले मरम्मत और चाभियाँ बनाने का काम करता था |     लगभग दस मिनट की मशक्कत के बाद उसने कोठी का ताला खोल दिया था |  गुप्ता परिवार  ने तब अत्यन्त आभार प्रदर्शन किया था |  
                          कल रात गुप्ता जी के पड़ौसी कोहली साहब की कोठी में चोरी हो गई थी |  चोरों ने बन्द ताले बगैर तोड़े खोल दिए थे और उनके एक घण्टे की अनुपस्थिति  में सब   माल पार कर दिया था |   
                           गुप्ता जी ने आगे आकर एक एक बार फिर जिम्मेदार शहरी का कर्त्तव्य निभाते हुए हरीश का नाम सुझाया था क्योंकि उसके इस हुनर को वो देख चुके थे और वो पर्याप्त गरीब भी था जो कि उनकी नजर में चोर होने की आवश्यक न्यूनतम अर्हता थी | 
“हम्म ..चलो ठीक है ..जाओ तुम ..पर शहर छोड़ कर कहीं मत जाना ..जरूरत हुई तो फिर बुलाएंगे ” बिश्नोई कुछ विचार करके हरीश को बोला |  
                             हरीश थाने से निकल कर कुछ विचारमग्न सा अपनी खोली की तरफ जा रहा था |  पिछली गिरफ्तारियों  से उसने सबक लिया था कि उसकी गरीबी ही उसके चोर होने का सबसे बड़ा सबूत है और  पुलिस की मार तो उसे उस कॉलोनी में चोरी होने पर पड़नी तय ही थी तो क्यों न कुछ कर के मार खाई जाय |  इस बार उसने खुद ही हाथ साफ किया था …. गरीबी से मुक्त हो कर ही इन इल्जामों से मुक्त हुआ जा सकता था ..इसके लिये चोरी से सरल कोई और उपाय उसे नहीं सूझा था और इसके लिये वो अगली बार गुप्ताजी का आभार व्यक्त करने की ठान चुका था |

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s