​● सहानुभूति ●

आज बी एस सी फाइनल का रिजल्ट आया था |  मनोहर चावला सैकिंड डिवीजन से पास हुआ था जबकि उसका दोस्त गिरीश माथुर  फेल हो गया था | गिरीश सैकिंड ईयर तक यूनिवर्सिटी में तीसरे स्थान पर चल रहा था और इस साल उसने अपनी पूरी मेहनत झौंक दी थी और सब को उम्मीद थी कि इस बार वो आगे निकल कर टॉप कर लेगा | शुबह 7 बजे रिजल्ट आउट हुआ था जिसमें सारी वेबसाइट्स गिरीश की मार्कशीट एक जैसी ही दिखा रही थी |  उसे सभी ऑप्शनल सब्जेक्ट्स के एक एक पेपर में जीरो मिला था | उसका शुबह से रो रो कर बुरा हाल था | मनोहर लगभग 8 बजे आ गया था | तब से लगातार वो उसके साथ था | अभी शाम के पांच बज चुके थे और अब वो उसे तीसरी बार बाहर घूमाने ले गया था | गिरीश के अनिच्छा जाहिर करने पर उसने हर बार यही कहा कि लोगों का सामना करो , डर कर घर में बैठने से समस्या हल नहीं होती | गिरीश सदमे में था |  उसे पूरी दुनिया में मनोहर से सच्चा मित्र कोई नहीं लग रहा था |  खुद पास हुआ था पर बजाय अपने घरवालों के साथ ख़ुशी मनाने के वो दिन भर से उसके साथ था |  रोते पीटते पूरा दिन बीत गया | 
             रात के लगभग आठ बज चुके थे | मनोहर अब भी उसके पास ही बैठा था | गिरीश के मोबाईल पर घण्टी बजी | उसने निर्लिप्त भाव से स्क्रीन की तरफ देखा | वो शुबह से किसी का फोन उठा ही नहीं रहा था क्योंकि ज्यादातर लोग रिजल्ट की पूछताछ या फिर सांत्वना के ही फोन कर रहे थे | पर यह तो हरीश खंडेलवाल का फोन था |  वो भी पढ़ाई में काफी होशियार था पर इस बार वो भी फेल हुआ था |  उसने फोन उठाया ..

“हैल्लो ..हरीश ”

“अरे बधाई है गिरीश तूँ ने यूनिवर्सिटी टॉप की है ..” उधर से ख़ुशी की किलकारी मारती सी आवाज़ आई 

“क.. क्या ..?  पर मैं तो फेल हो गया हूँ ..?”

“अरे मैं दिन भर से यूनिवर्सिटी में ही  बैठा माथा मार रहा हूँ |  तुझे जिन सब्जेक्ट में जीरो मिला था उन्हीं में मुझे भी और अपनी कॉलेज के 17 और स्टूडेंट्स को भी जीरो मिला था .. मेरा माथा तभी ठनक गया था.. यहाँ कुछ तकनीकी दिक्कत से गलत रिजल्ट आउट हुआ था अब सुधार दिया है ,  मैं भी पास हो गया हूँ सत्तर प्रतिशत से.. रिजल्ट अब चाहे तो दुबारा देख ले.. मिठाई तैयार रखना हम सब आ रहे हैं तुम्हारे घर ..” 

गिरीश ने तुरंत लेपटॉप स्टार्ट किया | वेबसाइट के बी एस सी फाइनल ईयर के रिजल्ट के लिंक पर “रिवाइज्ड” ब्लिंक कर रहा था | क्लिक करते ही उसका फोटो रिजल्ट पेज पर ऊपर दाँई तरफ लोड हो रहा था बधाई संदेश के साथ .. रोल नम्बर और नाम वगैरह इन्सर्ट करते ही मार्कशीट सामने थी .. उसने यूनिवर्सिटी टॉप कर ली थी |  वो माँ से लिपट गया ..आँखों में ख़ुशी से आंसू छलछला आए थे | पिताजी और माँ भी बहुत खुश थे | 

                   मनोहर की प्रतिक्रिया काफी ठंडी रही | उसने भी गिरीश को बधाई दी पर उसके स्वर में उत्साह की कमी गिरीश को कुछ अखर रही थी | अब मनोहर को एकाएक देरी होने लगी थी |  उसने कहा कि शुबह कोई जरूरी काम है इसलिये जल्दी उठना पड़ेगा ,  गिरीश और उसके माता पिता ने कहा भी कि हरीश और कई दूसरे दोस्त आ रहे हैं सबसे मिल कर और उनके साथ मिठाई खा कर जाना पर वो रुकने के लिये तैयार न हुआ |  माँ प्लेट में मिठाई डाल लाई तो बताया कि पेट डिस्टर्ब है ,  आजकल मिठाई खाता ही नहीं था |  वो काफी उद्विग्न हो गया था,  रोकते रोकते भी वो चला गया | 

                गिरीश को ख्याल आया इतने वर्षों में  आज वो रिजल्ट वाले दिन पहली बार ही आया था |

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