● मूल्यांकन ●

रामबाबू चटर्जी बहुराष्ट्रीय कम्पनी में विपणन अधिकारी थे | कल उनके इकलौते पुत्र का जन्मदिन था और सदैव की भाँति जन्मदिन की पार्टी किसी होटल में जाकर सेलिब्रेट न करके शहर के अनाथालय में भोजन सामग्री देकर आने के उनके निर्णय का उनकी दोनों बड़ी बेटियां , पत्नी शारदा और वृद्ध माँ कौशल्या देवी घनघोर विरोध कर रहे थे | उनका कहना था कि यह क्रूरतापूर्ण है कि 12 वर्ष के रोहन को उसके जन्मदिन पर अभावों से साक्षात्कार करवाया जाए | लेकिन रामबाबू दृढ़प्रतिज्ञ थे |

रामबाबू कितने ही दिनों से उधेड़बुन में थे | वो देख रहे थे कि रोहन ज्यादा लाडप्यार के कारण हठी हुआ जा रहा था | परसों जब वे कम्पनी के काम से जाकर वापिस शहर लौट रहे थे तो उनका पर्स चोरी हो गया था | आठ घण्टे का ट्रेन का सफर उन्होंने ऊपर की जेब में बचे रह गए ट्रेन के टिकट और दस रुपये के नोट के साथ किया था | भूख और प्यास को इतने करीब से पहली बार देखा | बिसलरी की बोतल, जिसे कई बार दो घूँट के बाद रखकर भूल जाते थे, उसे ललचाई नज़र से देखते हुए स्टेशनों पर प्याऊ का पानी पिया था | वटाटा, कचौरी और पकौड़े जो कभी इतने भौंडे लगते थे कि उन्होंने गौर से देखे भी नहीं होंगे, अप्रतिम सौन्दर्यशाली भोज्य पदार्थ प्रतीत हो रहे थे | यात्रा के पांच घण्टे बाद काफी सोच विचार कर उन्होंने पांच रुपये की चाय खरीदी थी और पांच रुपये बचा कर रखे | अभाव में उन वस्तुओं का भी मूल्यांकन हो रहा था जिन्हें उन्होंने कभी अपने स्तर की नहीं समझी | उन्हें रोहन की हठ के उपचार का यह तरीका तभी सुझा था | रोहन को भूखा प्यासा रखना उन्हें गवारा न था किंतु अभाव तो इसके बगैर भी दिखाए जा सकते थे | कल वो जब उसे पहले नए कपड़े दिलाने ले गए थे तो उसने हमेशा की तरह हंगामा किया था | तीन जोड़ी कदरन नए जूते पहले से उसके पास होने के बावजूद नए जूते लेकर ही माना था, वो भी सबसे महंगे वाले, लेकिन सन्तुष्ट नए जूतों से भी नहीं था | उसके बाद रामबाबू बाजार से फल और कुछ राशन सामग्री के साथ उसे अनाथाश्रम ले गए जहां राशन और नकद रुपये मैनेजर को सुपुर्द किये और फल वितरण रोहन के हाथ से व्यक्तिशः करवाया | लौट कर घर आने के बाद से रोहन कुछ खोया खोया सा था |

आज छुट्टी थी | रामबाबू को रोहन नज़र नहीं आया तो ढूंढते हुए कोठी के पिछवाड़े की तरफ आ गए | रोहन पुराने जूतों की पॉलिश करता दिखा | उन्होंने अपना मोबाइल जेब से निकाल कर वो फोटो फिर गौर से देखा जो रोहन ने उनसे मोबाईल मांग कर खींचा था | उनकी आँखे भर आई | उस फोटो में एक बालक जिसके दोनों पैर नहीं थे वह धरती पर बैठा चाक से अपने पैरों की आकृति बनाने की कोशिश कर रहा था | रोहन को शायद पैरों की और जूतों की दोनों की कीमत समझ आ गई थी | उन्होंने रोहन की भी जूते पोलिश करते हुए फोटो ले ली |

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