​● नौकरी ●

“लो शर्मा जी ये भी देखो तो ..” किशना राम हाथ में तुड़ा मुड़ा सा एक कागज का पुर्जा ऑफिस के  कम्प्यूटर पर बैठे क्लर्क शर्मा जी को देता हुआ बोला  | आज पुलिस सब इंस्पेक्टर  के नतीजे जारी हुए थे | साहब के बेटे ने भी परीक्षा दी थी |  शर्मा जी पहले उनका परिणाम निकाल कर उन्हें चेम्बर में देकर आए थे |  
“अरे किशनाराम तेरे लौंडे ने तो इस बार भी कमाल कर दिया .. 71.45 प्रतिशत आए हैं ! ” शर्मा जी प्रिंटर में से अंकतालिका निकाल कर देते हुए बोले | 

“तो क्या नौकरी मिल गई ..?” किशनाराम की काली सफेद मूंछें फड़फड़ा रही थी | 

“अरे घुघू राजा …” शर्माजी खिड़की से बाहर पानमसाले की पिचकारी छोड़ते हुए बोले”अभी कट ऑफ कहाँ जारी हुई है ” 

“वो क्या होती है ?”

“वो कम से कम नम्बर जिसके बराबर या उससे ज्यादा नम्बर वालों का नौकरी में सलेक्शन होता है ” 

“तो कब होगी ..?” किशनाराम को भारी उत्सुकता हो रही थी | 

“शाम तक हो जाएगी ” कहते हुए शर्मा जी एक फाइल में आँखें गड़ा कर बैठ गए 

“साब के लड़के की कितनी थी ?” 

“उसकी 67 प्रतिशत बनी है ” 

“तो मेरे छोरे की तो उससे भी ज्यादा है ..” 

किशनाराम गर्व से छाती फुलाए दिन भर अंकतालिका ऑफिस के लोगों को दिखाते फिरा |  जब से उसका लड़का पढ़ने लगा था तब से परीक्षा परिणाम का दिन हमेशा खुशियों भरा रहा था | एक बार जब 10वीं का परिणाम आया था तब तो उसकी अख़बार में फोटो भी छपी थी |  

                    शाम को छुट्टी के समय शर्मा जी ने कहा कि साहब के घर के पास एक इंटरनेट की दुकान है वहां रात तक पता कर लेना तब तक शायद पता चल जायेगा |  वो रात को खाना खाकर  सीधा  उसी दुकान के पास  पहुंचा |  वहां साहब खुद नाईट सूट पहने खड़े थे |  लोगों ने उन्हें घेर रखा था और बधाइयां दे रहे थे | किशनाराम के दिल की धड़कन ख़ुशी के मारे तेज हो गई थी |  अब किसी से कुछ पूछने का मतलब ही नहीं था |  साहब के लड़के का अगर  नम्बर आ गया था तो उसके लड़के के तो प्रतिशत ज्यादा ही थे |  वो वहां से साईकिल को सरपट भगा कर घर पहुंचा | आज उसे अपनी पत्नी मोहिनी भी सुंदर लग रही थी | जब यह खुशखबर उसने पत्नी को  सुनाई तो उसने झट से कुछ रूपये अलग अलग निकाल कर रख दिए जो उसने पुत्र की नौकरी लगने पर अलग अलग देवी देवताओं के चढ़ावे के बोल रखे थे |  बेटा ललित जयपुर गया हुआ था कोई नौकरी की परीक्षा देने |  उसका फोन भी स्विच ऑफ आ रहा था |  कई देर किशनाराम पत्नी से बतियाता रहा |  उसका तो खानदान ही चपरासियों का था | पिताजी और दादाजी भी चपरासी थे | दादाजी साथ में कुछ पूजापाठ का काम भी करते थे |  यह कुलदीपक पहला ही निकला था जो पुलिस का इंस्पेक्टर बन गया था | 

               उसने पत्नी को बताया कि साहब कितने बड़े अफसर हैं और मेमसाहब तो उनसे भी बड़ी अफसर है |  घर में तीन तीन मोटर गाड़ियां हैं | उन्होंने बेटे को कितनी बड़ी स्कूल कॉलेज में पढ़ाया था और उसे अभी कोचिंग के लिये जयपुर ही रखा था |  उसका लल्लन तो वहीं कस्बे की सरकारी स्कूल कॉलेज में पढ़कर भी साहब के लड़के से ज्यादा नम्बर लाया था | 

                    उसने घड़ी की तरफ नज़र दौड़ाई |  रात के दस बज रहे थे |  मुहल्ले की पान की दुकान पर हेमन्त के आने का समय हो गया था |  कितने ही महीनों से वो उस तरफ नहीं गया था | तब उसे मौका मिला था उस हेमन्त से बदला लेने का  |  उस रात पूरे एक किलो पेड़े लेकर वो पान की दुकान गया | जब उसने अपने बेटे के पुलिस में इंस्पेक्टर बनने की खबर सुनाई तो  हेमन्त की तो हवा उड़ गई | उपस्थित सभी मुहल्लेवासियों ने उसे अत्यन्त सम्मानजनक ढंग से बधाई दी |  हेमन्त ने भी  काफी लल्लो-चप्पों कर किशनाराम से माफ़ी मांगी थी |  किशनाराम को उसने फिर से “उस्ताद जी” स्वीकार कर लिया था | ख़ुशी के मारे किशनाराम को पूरी रात नींद नहीं आई | 

                  अभी अभी ही ललित जयपुर से आया था |  उसकी आँखे लाल हो रही थी और चेहरा उतरा हुआ | किशनाराम गेट खोलते ही उसका थैला अपने हाथ में ले कर अपनी चारपाई तक “प्रोटोकॉल” करता लाया | कुछ देर किशनाराम उसे गौर से देखता रहा जैसे पहली बार देख रहा हो फिर अचानक उसे बाँहों में भर लिया 

“अरे क्या हुआ बाउजी ?  अरे छोड़िये ..” ललित उसकी मजबूत पकड़ में फड़फड़ा रहा था |  

“इंस्पेक्टर बन गया मेरा लल्लन इंस्पेक्टर बन गया ..” 

“ये क्या कह रहे हैं ? मेरा तो सलेक्शन हुआ ही नहीं ,  आपको किसने कहा ..?” खुद को पकड़ से छुड़ाता हुआ लल्लन चौक कर बोला 

“क्या ?  कल तेरा रिजल्ट आ गया था न ..” जेब से उसकी मार्कशीट निकाल कर देते हुए किशनाराम ने कहा ”  मैंने अपने ऑफिस में निकलवा ली थी 

“यह तो ठीक है पर कट ऑफ तो 75 प्रतिशत गई , इसलिये मेरा नहीं हुआ ” 

“अरे यह कैसे हो सकता है ?  साहब के लड़के के तेरे से कम नम्बर है और जब उसका हो गया तो तेरा क्यों नहीं हुआ ?” किशनाराम का कलेजा मुंह को आ रहा था उसके शरीर के सारे रोमछिद्रों में जैसे पसीना उगलने की होड़ मच गई थी 

“अरे आप समझते तो हो नहीं ..” अपने कंधे पर से किशनाराम का हाथ झटकते हुए उसने कहा ” आप के साहब पिछड़ी जाति के हैं इसलिये उनके बेटे का हो गया होगा क्योंकि एससी की कट ऑफ 65 परसेंट गई है 

“हें ??  साहब पिछड़े हुए हैं और तूँ  अगड़ा ?  तेरा दिमाग खराब हो गया …”

“क्यों परेशान कर रहे हो लल्लन को ..?” किशनाराम की पत्नी की क्रुद्ध आवाज ने जैसे उसकी चीख पुकार को पूर्ण विराम दे दिया “जाईये अपना काम कीजिये ..कुछ समझते हो न बुझते हो बस लगे टर्रटर्राने ..जब लल्लन कह रहा है कि नहीं हुआ तो नहीं हुआ ..बस ..अगली बार हो जायेगा ”  वो ललित को दुलार रही थी |  

                     किशनाराम को समझ ही नहीं आ रहा था कि इतने बड़े बड़े लोग “पिछड़े” कैसे हैं और वो अगड़ा | इस नासमझी के लिये भी उसने अपने घुघूत्व को ही जिम्मेदार मानकर  यह विचार तो झटक दिया लेकिन अब उसे भारी घबराहट हो रही थी हेमन्त की जिससे उसने ललित की इंस्पेक्टरी के जुकाम मे कान पकड़ा कर उठक बैठक लगवा ली थी |

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