​● खबर ●

वो घुटनों में मुँह छुपाए बैठा था |  शरीर पर सिर्फ  अंडरवियर के अलावा कोई कपड़ा नहीं था | शरीर की एक एक हड्डी चमक रही थी | कभी कभी चेहरे पर उगी घास फूस सी दाढ़ी खुजाने के लिये मुँह घुटनों से निकालता तो चेहरा भी नुमाया हो जाता |  सूखे पत्ते सी पीली रंगत के उस आदमी की आँखे कटोरियों में धंसी हुई थी |  प्रकाश गुप्ता एक नामचीन अख़बार का नौजवान  क्राइम रिपोर्टर उस समय थाने में एस एच ओ चौहान के चेम्बर में उनका इंतजार करता करता ऊब कर टहलता हुआ इधर आ गया था और लॉकअप में लोहे के सिखन्चों के पार उस हड्डियों के ढांचे को गौर से देख रहा था |  उसे पुलिस वालों से वितृष्णा सी होने लगी |  बड़े बड़े अपराधी खुले घूम रहे हैं पर ये लगे हैं  इन गरीब भिखारियों को पकड़ने में और बिना हेलमेट के दुपहिया वाहन चालकों को पकड़ने में | उसने इस अत्याचार की खबर बनाने का मन बना लिया | 
“आइये वीर पुरुष !” चौहान को प्रविष्ट होते देख वो व्यंग से मुस्कुरा कर बोला “तो कल  यह समाचार छाप दें ..पुलिस ने पकड़ा डेढ़ पसली का शेर ..”  वो अपने पीछे अंगूठे से लॉकअप की तरफ इशारा करता हुआ बोला और  उसके पीछे चेम्बर में प्रविष्ट हुआ और विजिटिंग चेयर पर ढेर हो गया | 

“नहीं खबरें और भी है ” चौहान मुस्कुरा कर बोला 

” मुझे तो आज की सबसे बड़ी खबर यही लग रही है ” प्रकाश सुलगते स्वर में बोला

 ” आप लोग गरीब मार करते हो .. इसको पकड़ा होगा किसी सौ पचास रुपये की चोरी के इल्ज़ाम में, अब आप इसे कोर्ट में पेश कर देंगे और न्यायिक हिरासत में भेज कर भूल जाएंगे , इसकी जमानत के लिये भी कोई नहीं आएगा और कुछ बरसों बाद या जैसी इसकी हालत दिख रही है हो सकता है कुछ ही दिनों  में इसकी मृत देह ही जेल से निकलेगी …दया नहीं आती आपको ? ”  कहते हुए उसका चेहरा तमतमा उठा  

“दया ही तो आती है पत्रकार जी वरना इन जैसों को पकड़ कर हमें क्या लाभ ?” चौहान ने  वायरलैस टेबल पर  रखते हुए कहा 

“यह कैसी दया ?” 

“तो सुनिये पत्रकार जी ..यह जो हड्डियों की दुकान आप देखकर  आ रहे हो यह है रघु नशेड़ी |  न तो यह चोरी करता है और न ही किसी को तकलीफ देता है |  यह सब तरह के नशे लेता है और पता है पैसों के लिये क्या करता है ? यह ब्लड डोनर है .. अपना खून बेचता है वो भी अलग अलग नाम लिखा कर .. हर 10 -15 दिन में .. शहर के अलग अलग अस्पतालों और  ब्लड बैंको के आस पास मंडराता रहता है और जरूरतमंदों को फ़ांसता है |  कल डॉक्टर  साहनी ने फोन कर हमें बताया कि उन्होंने इसकी हालत देख कर कईं बार पहले भी समझाया जिसे इसने कभी नहीं सुना | दया उनको आई तो उन्होंने हमें फोन किया और हमें दया आई तो हमने इसे अरेस्ट किया है ..जानते हो क्यों..? क्योंकि इसका हीमोग्लोबिन 5 रह गया है..इसे छह महीने तक जमानत नहीं होने देंगे ताकि  इसे दोनों समय रोटी खाने को मिले और इसके शरीर में खून बन सके .. नहीं तो पत्रकार जी यह अगले ब्लड डोनेशन के साथ ही शहीद हो जाता..”  

प्रकाश निरुत्तर था |  अब उसकी इस मामले से दिलचस्पी भी समाप्त हो गई थी यह कोई खबर जो नहीं रही थी |

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