​●अभिनेत्री●

 “कट कट …कैमरा ऑफ़ ..लंच ब्रेक ..   क्या कर रही हो निशा एक सिम्पल सा एक्सप्रेशन नहीं दे पा रही ..”  गिरीश मल्होत्रा सेट से उसकी तरफ आती हुई ऐक्ट्रेस निशा सेठी पर जैसे झल्ला पड़ा था | निशा उसकी फिल्म की लीड एक्ट्रेस थी और उसे फिल्म में अपने पति के नए बिजनेश के लिए अपने दौलतमंद   दोस्त से  पचास करोड़ की मांग  करनी थी | सम्वाद अदायगी तो ठीक थी परन्तु बकौल फिल्म निदेशक गिरीश मल्होत्रा  चेहरे पर  “उम्मीद” के भाव सही तौर पर नुमाया नहीं हो रहे थे | इसके लिये वो लगातार पन्द्रह रीटेक  दे चुकी थी |  बाकि कलाकार भी ऊब चुके थे |  

                        पिछले पांच बरस में निशा लगभग बारह फिल्मों में अभिनय कर चुकी थी जिसमें सात फ़िल्में सुपरहिट रही थी इसके अतिरिक्त पिछले बरस बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड भी उसे मिल चुका था |          

                          निशा तमतमाई सी सीधी अपनी वैनिटी वैन में चली गई जहां उसने हल्का फुल्का लंच लिया और वहां से निकल कर शोफर से चाबी  लेकर अपनी कार में बैठ कर बिना किसी को बताये रवाना हो गई |            

                           गिरीश मल्होत्रा की उसके साथ चौथी फिल्म थी |  उसे उसकी रवानगी पर कोई ताज्जुब नहीं हुआ क्योंकि ऎसा पहली बार नहीं हुआ था |  जब भी वो किसी सीन में अटक जाती थी तो इसी तरह से सेट से रवाना हो जाती थी लेकिन घण्टे दो घण्टे में वापिस आने के बाद वही सीन एक बार में ही दे देती थी |  कोई नहीं जानता था  कि वो जाती कहां थी | पूछने पर भी कभी बताती नहीं थी | लेकिन आज कुछ सोच कर उसने तुरंत दौड़ कर अपनी गाड़ी निकाली और तीर की तरह सरपट उसी दिशा में दौड़ा दी जिधर निशा गईं थी |                

                         स्टूडियो से निकल कर  निशा  रोड़ पकड़ चुकी थी |  गिरीश कुछ दूरी बनाये रखकर पीछा करता रहा |  अगले लगभग एक घण्टे तक निशा सड़क पर यूँ ही गाड़ी दौड़ाती रही |  एक जगह से उसने यू टर्न लिया और अब वापिस स्टूडियो की तरफ फुल स्पीड से बढ़ रही थी |  गिरीश भी उसके पीछे पीछे स्टूडियो पहुंच गया |  जब वो पहुंचा तो निशा शूटिंग के लिये रेडी थी |   सेट पर पहुंचते ही निशा ने सिंगल टेक में शॉट ओके करवा दिया |  गिरीश शॉट से पूर्ण संतुष्ट था पर उसके दिमाग की उलझन बढ़ गई थी |  उसे समझ ही नहीं आया कि निशा घण्टे भर ड्राइव करने के बाद ही क्योंकर इतना परफेक्ट शॉट दे सकी ?  

“निशा अदरवाइज मत लेना पर आज मैंने तुम्हारा पीछा किया था ..”  गिरीश की बात सुनकर आराम कुर्सी पर बैठी निशा की आँखों के भाव कुछ कठोर हो गए थे 

“… क्योंकि मैं हमेशा सोचता हूँ कि बीच शूटिंग में तुम जाती कहाँ हो ..” गिरीश उससे आँख चुराता सा कह रहा था    “…जहां से आकर परफेक्ट शॉट  देती हो ”  

“देखो गिरीश ..यह मेरा प्राइवेट मामला है और मैं किसी को बताना जरूरी नहीं समझती…और अब मैं थक भी चुकी हूँ पैकअप करो .. ”  निशा पटाक्षेप करती हुई गिरीश के किसी जवाब का इंतजार किये बगैर उठ कर रवाना हो गई |  उसके इशारे से शोफर गाड़ी निकाल लाया था | 

“अरे निशा …” गिरीश चिल्लाया लेकिन उसकी गाड़ी स्पीड पकड़ चुकी थी |  उसके हाथ में निशा का फोन था जिसे वो शायद वहीं भूल गई थी | उसने निराशा से गर्दन हिलाते हुए असिस्टेंट को बुलाया और पैकअप का फरमान सुनाते हुए कुर्सी पर धारासाई  हो गया |  सिगरेट सुलगाते हुए उसने देखा निशा का फोन अनलॉक्ड था |                  

                            सिगरेट के कश लगाते हुए वो यूँ ही बेख्याली में उसकी गैलेरी देखने लगा ..और पहला फोटो देखते ही उसके दिमाग में जैसे बिजली सी कौंध गई |  वो एक भिखारी का फोटो था जो उसकी कार के पास खड़ा था जो उसने बन्द शीशे से लिया था और अगला फोटो आधा शीशा खोल के लिया था |  आधे खुले शीशे से भिखारी की सूरत पर उम्मीद की किरण साफ नजर आ रही थी |  उसने तेजी से स्क्रीन स्वाइप की और देखा सारे फोटो इसी तरीके से लिए हुए थे ..कभी भिखारिन कभी कोई बच्चा ..एक  घण्टा गाड़ी दौड़ाने के दौरान  आए रेड सिग्नल पर उसने ये सारे फोटो लिये थे |  सभी चेहरों पर उम्मीद की छाप थी |  उसे अब समझ आ चुका था कि घण्टे भर की ड्राइव में निशा उम्मीद के भाव कहाँ से लाई थी |  वो निशा के अभिनय के प्रति समर्पण का  मुरीद हो गया और कुर्सी पर  आराममुद्रा में बैठकर तृप्तिपूर्ण भाव से सिगरेट के कश लेते हुए आगामी शूटिंग शिड्यूल पर चिंतन करने लगा |       

                             अचानक कुछ सोच कर वो भयभीत हो उठा और उसकी पेशानी पर पसीने की बुँदे तैरने लगी |  वो गैलेरी तेजी से स्वाइप करने लगा पर उसमें पिछले तीन दिवस की कुल सत्रह फोटो ही थे और फोन खाली पड़ा था  |  उसे दो साल पहले की याद आ गई थी |  उसकी फिल्म जीवन और मृत्यु की शूटिंग जैसलमेर में चल रही थी |  निशा उस फिल्म में नायिका थी और उसे डूब कर मरने का अभिनय करना था जिसकी अंडरवाटर शूटिंग की गई थी |  पानी के अंदर डूब कर मरते हुए की जो नेचुरल एक्टिंग उसने की थी उसकी आज भी इंडस्ट्री में चर्चा है |                

                              निशा गड़ीसर झील के किनारे खड़ी होकर उसे बता चुकी थी कि वो बचपन से तैरने में माहिर है इसलिये उसे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी |  उस दिन पूरा दिन बीतने तक भी अंडरवाटर शूटिंग ओके नहीं हो पाई थी  | निशा काफी अच्छी तैराक थी इसलिये कितनी भी गहराई में जाने पर उसके चेहरे पर वो भय और घबराहट के भाव पैदा नहीं हो पा रहे थे जो एक तैरना न जानने वाली लड़की के चेहरे पर डूबते समय होने चाहिये |  गिरीश ने दिन ढलते ढलते बतौर निदेशक तय कर लिया था कि पानी के अंदर का सीन शूट ही नहीं करेंगे लेकिन निशा ने इसे चैलेंज के रूप में लिया और कहा कल एक बार और ट्राई करें |  दूसरे दिन जैसे चमत्कार हो गया था |  निशा ने एक बार में ही इतना शानदार शॉट दिया कि बाहर बैठे गिरीश को स्क्रीन पर देखते हुए घबराहट हो गई थी कि कहीं यह सच में ही डूब तो नहीं रही |                     

                             उसी दिन शाम को उनकी  होटल में समाचार आया था कि गड़ीसर तालाब में एक मजदूर महिला की लाश तैर कर ऊपर आ गई थी और उसी जगह पर आई थी जहां उन्होंने शूटिंग की थी | गोपा चौक में चल रहे सड़क मरम्मत कार्य में लगी वो महिला मजदूर सवेरे छः बजे गड़ीसर तालाब की तरफ जाते हुए देखी गई थी |                   

                               वो घटना उसे दो कारणों से याद थी | एक तो यह अहसास कि उन्होंने एक डूबी हुई लाश के साथ पानी के अंदर शूटिंग की थी और दूसरा यह कि रोज नौ बजे उठने वाली निशा उस दिन सवेरे पांच बजे उठकर जॉगिंग पर निकल गई थी जो लगभग सात बजे उसे वापिस आती हुई मिली थी |  घबराहट में उसकी धड़कन तेज हो चली थी |    

                                 अब उसे तीन साल पहले की वो फिल्म भी याद आ रही थी जिसमें निशा ने जहर खाकर मरने की एक्टिंग की थी और उसी रात प्रोडक्सन असिस्टेंट कमल बैरवा ने जहर खा लिया था..

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