● तांत्रिक बिरजू ●

वो एक उमस भरा गर्म दिन था |  मैं अपनी बाईक पर ऑफिस से घर की तरफ बढ़ रहा था  | सड़क किनारे एक दुकान नई खुली लग रही थी |  बाहर पर्दा लटक रहा था जिस पर लिखा था

 ‘तंत्र-सम्राट’ 

मौत को छोड़ हर समस्या का शर्तिया ईलाज 

तांत्रिक बृजभूषण ‘बृज’ 

गोल्ड मेडलिस्ट 
उस पर्दे  को देखते ही मुझे समझ आ गया कि बिरजू ने फिर नया खेल किया है | बृज भूषण को तो आप पहचान गये होंगे | बृज की पिछली बार नेतागिरी के बाद जो गति हुई थी उसके बाद मेरी संज्ञान में वो कवि हो गया था | लेकिन तब पता चला की मेरा उसके बाबत ज्ञान अपूर्ण था | मोटरसाइकिल सड़क किनारे पार्क कर मैंने धड़कते दिल से उस दुकान का कांच का दरवाजा ठेला  | अंदर का माहौल धूप अगरबत्ती से  धुंआ धुंआ था | कोई पन्द्रह बाई बीस की उस दुकान में एक तरफ सफेद गद्दा बिछा था जिस पर कोई खाल के आसन पर मोटा बिरजू अत्यन्त धीर गम्भीर मुद्रा में  विराजमान था |  उसने पीले रंग की धोती और कुर्ता धारण कर रखा था जिसमें से उसकी विशाल तोंद निकलकर बाहर आ रही थी |  उसकी आँखे बंद थी और उसके सामने एक बुजुर्ग स्त्री और पुरुष श्रद्धापूर्वक हाथ जोड़े बैठे थे | 

                       मेरे गेट खोलने के खटके को सुन कर उसने एक आँख खोली और मुझ पर नजर पड़ते ही उसने अपनी   भारी   आवाज में  पूछा    ” दिहाड़ी से लौट रहा है क्या गंवार आदमी ?” 

“अबे हावड़ा ब्रीज..”  मुझे ताव आ गया 

“श्श्श्श ..” उसने अपने मुंह पर अंगुली रखते हुए वहां उसके सामने बैठे दम्पति की तरफ आँखों से गुप्त इशारा किया |  साथ ही इशारे से मुझे बैठने को कहा |

              बिरजू ने पुनः आँखे मूंद ली और कई देर तक ध्यान मुद्रा में आसन लगाए रखा |  कुछ देर में आँखें मूंदे मूंदे ही वह कुछ बड़बड़ाने लगा “दया करो इन पर  दो बेटियाँ हैं पहले से ..लेकिन ..अच्छा मैं बात करता हूँ …” फिर उसने झटके से आँखें खोल ली 

“मेरी बात हो गई है ..समाचार अच्छे नहीं है .. इस बार आपकी लड़की के फिर से बेटी ही पैदा होगी ..तीसरी लड़की …”  बिरजू किसी देवदूत की तरह भविष्यवाणी कर रहा था |  

“महाराज दया ..”  बुजुर्ग महिला चित्कार करती हुई बिरजू के कदमों में लोट गई | पुरुष हाथ जोड़े भरी भरी  आँखों से देख रहा था |  

“स्पर्श नहीं ”   बिरजू गरज उठा  |  उसकी उस अचानक गरज से दम्पति दहल  उठे “हमें स्पर्श किया तो हम अशुद्ध हो जायँगे मुर्ख ” 

“क्षमा महाराज क्षमा ..” पुरुष कुछ सहमें स्वर में गिड़गिड़ाया 

“हम्म”  

“कुछ उपाय कीजिए महाराज ..वरना मेरी बेटी की सास इस बार उसे घर से निकाल देगी ..” कहता कहता वो रो पड़ा 

“उपाय तो है पुत्र ..लेकिन तुम गरीब लोग कर नहीं पाओगे ..” बिरजू कुछ शांत स्वर में अपने बाप की उम्र के बुजुर्ग से “पुत्र”  के संबोधन के साथ संबोधित था 

“हम जरूर करेंगे महाराज ..कितना खर्च लगेगा ?” 

“एक लाख ..” 

“एक लाख !” 

“हाँ |  पूरे एक लाख ..यह अमीर लोग ही करवा सकते हैं ..तुम जैसे गरीब लोग नहीं ..” 

“हम एक लाख की व्यवस्था कर देंगे ..” महिला भावुक हो गई थी “लेकिन बेटा ही होना चाहिए ..” 

“मेरी जिन्नों से बात हुई है ..पूरे दस जिन्न हैं ..सब मिल कर कोशिश करेंगे ..”  

“कोशिश ? कोशिश नहीं महाराज हमें गारंटी चाहिये ..” महिला कुछ आवेश में आ रही थी 

“मूर्ख  स्त्री .. !” बिरजू अपने पूरे  जलाल  से   गरजा |  लगा कि  इस बार की उसकी गरज कुछ ज्यादा तेज हो गई थी क्योंकि उसके पास बैठे हुए मुझे उसकी अधोवायु की गरज भी साथ ही सुनाई दी, गद्दे पर तीव्र वाइब्रेसन के साथ ..

मैंने तुरन्त एक अगरबत्ती और जला दी | 

“गारंटी मांगती है ? वो भी जिन्नात से ? ” इस बार कुछ कम वोल्युम में बिरजू गरजा 

“..फिर से बेटी हो गई तो हम तो लूट जायेंगे ..एक लाख हमारे लिये बहुत बड़ी रकम है महाराज ..दया कीजिये ..”  बात आर्थिक थी शायद इसलिये पुरुष गिड़गिड़ाता हुआ लोटपोट हुआ 

“ह्म्म्म …पुनः वार्ता करता हूँ ”  एक लंबी हुंकार के साथ बिरजू पुनः ध्यान मुद्रा में लीन हो गया  |  स्त्री और पुरुष दोनों ही हाथ जोड़े आशापूर्ण नेत्रों से उसे देख रहे थे  | तभी बिरजू कुछ देर तक बड़बड़ाता हुआ चुप हुआ और आँखे खोल दी 

“क्या बात हुई महाराज ?” स्त्री ने अधीर होकर पूछा

“कुछ कुछ बात बनी है .. कह रहे हैं कि पूरी कोशिश करेंगे ..लेकिन ईश्वर से पंजा लड़ाना आसान नहीं ..हार भी सकते हैं ..अगर हारे तो पैसे वापिस कर देंगे ..”  बिरजू ने आश्वासन देते हुए बताया 

” ठीक ही कह रहे हैं..” स्त्री ने पति की तरफ देखा  “क्योंजी ?.”  पति कुछ हड़बड़ाया “ठ.. ठीक है महाराज ..मैं आज शाम को ही पैसे ले आ आऊंगा ..डिलेवरी एक महीने बाद है ..बस कोशिश पूरी करा दीजिए महाराज ..” इसके बाद दोनों ने बिरजू को प्रणाम किया और चले गए |  

मैं मंत्रमुग्ध सा सम्पूर्ण कार्यवाही देखता हुआ खुद को जैसे किसी मायाजाल में अनुभव कर रहा था | 

“बिरजू ..तूँ तो बड़ा तांत्रिक हो गया रे ” 

“ह ह ह ..धंधा है ..”  वो पूरी ठसक के साथ हंसा 

“धंधा ?” 

“हाँ ..रे  गँवारू |  अबे लड़का या लड़की होने के चांसेज फिफ्टी फिफ्टी होते हैं ..अगर मैं ऐसे दस ठेके लेता हूँ तो चार पांच तो कम से कम लड़के होंगे ही ..ज्यादा भी हो सकते हैं ..जितने ठेके पास उनके पैसे जब्त ..बाक़ियों को सॉरी के साथ रिटर्न …अपनी तो कमाई पक्की ” बिरजू अपनी विशाल तोंद पर से ऊपर चढ़ता कुर्ता और बनियान नीचे खींचता हुआ गद्दे पर पसर गया | 

                        इस घटना के बाद  बिरजू की दुकान जिसे कि वो ऑफिस कहता था , मैं  कभी नहीं गया इसलिए मुझे जानकारी नहीं कि उक्त मामले में लड़का पैदा हुआ या लड़की |  अगले छः महीने बिरजू की चांदी रही | लेकिन कागज की नाव ज्यादा दूर नहीं चलती |   जनता का विश्वास व्यक्ति में स्वयं के कर्ता होने का झूठा दर्प पैदा कर देता है इसलिए इन जैसे लोगों को चाहिये के समय समय पर दर्पण देखते रहें |  बहरहाल एक दिन समाचार पत्र से ज्ञात हुआ कि एक महिला ने बृजभूषण ‘बृज’ पर धोखाधड़ी और ठगी के आरोप लगाए साथ ही अपने साथ हुए वाकये की मोबाईल रिकॉर्डिंग  भी पुलिस को पेश कर दी |  बिरजू फ़िलहाल पुलिस हिरासत में है और सूचना मिली है कि उसके दोनों खरबूजे फोड़े जा रहे हैं | लेकिन समाज में जब तक अन्धविश्वास रहेंगे तब तक  बिरजू आते रहेंगे ..ठगते रहेंगे | 
Avinash Vyas

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