● सौदा ● 

बरसात का मौसम शुरू हो गया था | रात के दस बज रहे थे | जुहू की उस आलीशन कोठी में शक्तिदेव सिंह राठौड़ अपनी विशाल स्टडी में चिंतित मुद्रा में खड़ा था | उसके सामने सोफे पर एक सामान्य से रखरखाव वाली मराठी महिला कमला बैठी थी जबकि दूसरी तरफ एडवोकेट मेहरा बैठा था | मामला गम्भीर था |

नियमित ड्राइवर मोहन खड़गे छुट्टी लेकर अपने गांव गया हुआ था | उसका इकलौता बेटा अभयदेव सिंह राठौड़ दो घण्टे पहले नशे की हालत में बदहवास खुद कार चलाता लौटा था और बकौल उसके, उसने नशे की हालत में कार चलाते हुए एक बाइक सवार को उड़ा दिया था जिसकी ठौर मौत हो गई थी | वो वहाँ से कार भगा कर घर आ गया था लेकिन वहाँ मौजूद लोगों का उसकी आलिशान सफेद मर्सिडीज को पहचान लेना और पुलिस का किसी भी वक्त उसके घर पहुंचना महज वक्त की बात थी | साफ हिट एंड रन का केस था जिसमें राठौड़ खानदान का इकलौता चश्मोचिराग जेल की लंबी सजा का और उसका खानदान गहरी बदनामी का शिकार होना तय था |

फौरन बुलाये गये वकील दीनदयाल मेहरा ने सुझाव दिया था कि किसी ड्राइवर को पेश कर दिया जाना उसके सुपुत्र के बचाव का एकमात्र रास्ता था जो पुलिस और आगे कोर्ट में स्वीकार करे कि दुर्घटना के समय गाड़ी बजाय अभय के वह चला रहा था और मुआवजे के सदके सजा भी भोगने को तैयार हो |
उस घड़ी उसे कमला की याद आई जिसका पति शेखर गावले छः महीने पहले तक उन्हीं की मुलाजमत में ड्राइवर हुआ करता था | एक दिन उसके सीने नें तेज दर्द हुआ तब पता चला कि उसके हृदय का वॉल्व खराब हो चुका था | कमजोरी की वजह से वो किसी काम का नहीं रहा था इसलिये नौकरी से निकाल दिया गया था | तब कमला कई बार उसके यहाँ आई थी हाथपैर जोड़े और अपने बच्चों की दुहाई दी बीमार पति के महंगे ईलाज का रोना रोकर अपने पति को नौकरी पर बनाये रखने की गुहार की थी, पर तब राठौड़ ने उस पर कोई दया नहीं दिखाई थी बल्कि अंतिम बार जब वो आई थी तब बाकायदा धक्के मारकर निकाल दी गई थी |
“तो आप यह चाहते हैं कि मेरा घरवाला यह जुर्म अपने सिर पर ले ले और फांसी चढ़ जाय ..” कमला का स्वर वितृष्णापूर्ण था |
” अरे किसने कहा फांसी हो जायेगी .. देखो कमला .. तुम्हारी माली हालत ऐसी नहीं की तुम शेखर का ऑपरेशन करा सको और तुम लोगों के घरों में काम करके थोड़ा बहुत जो कमाती हो उसी से दवाइयां भी आती है और रोटी-पानी भी ..दोनो बच्चों की पढ़ाई छूट चुकी है ..शेखर जेल में रहेगा तो सरकारी खर्चे पर उसका बढ़िया ईलाज भी हो सकेगा ..नहीं तो तुम जानती ही हो कि डॉक्टरों ने वर्तमान हालात में हद से हद चार छः महीने से ज्यादा उसकी जीने की उम्मीद नहीं बताई है ..और यह दिमाग से निकाल दो की फांसी होगी ..इस तरह के केस में अधिकतम कुछ वर्ष की सजा होगी जिसे भी वकील साहब कम से कम करवाने की पूरी कोशिश करेंगे ..क्यों वकील साहब ?” उसने वकील मेहरा की तरफ अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा जिसने तुरन्त सहमति सूचक मुद्रा में गर्दन हिलाई |
“साहेब ..मैं शेखर से बात करूँगी तो वो मना नहीं करेगा ..लेकिन पीछे हमें क्या मिलेगा ?” कमला ने पूछा
“पुरे एक लाख ..” राठौड़ अपनी तर्जनी उंगली दिखाता बोला तो कमला जोर से इंकार में सिर हिलाने लगी
“क्यों ..!” राठौड़ के स्वर में विस्मय था
“मैं जिन गुप्ता जी के यहाँ काम करती हूँ उनके लड़के के दोनों गुर्दे खराब हैं ..शेखर का उसके लड़के से खून जाँच में मिलान हो गया है तो उसका एक गुर्दा निकाल कर गुप्ता जी के लड़के को लगेगा जिसके वो लोग पांच लाख दे रहे हैं ..” कमला ने बताया
“यह तो गैरकानूनी है..खून का रिश्तेदार ही किडनी दे सकता है ” राठौड़ आक्रोश में बोला
“आप वाला कौनसा क़ानूनी काम है ” कमला के चेहरे पर व्यंग्यपूर्ण मुस्कान थी
“लेकिन हार्ट का पेशेंट है वो . ऑपरेशन टेबल पर ही दम तोड़ देगा ..” राठौड़ ने जिद की
“वैसे भी चार छः महीने से ज्यादा कहाँ जीने वाला है ” कमला गमगीन भाव में बोली
“तीन लाख ..” राठौड़ ने जैसे बोली लगाई
“चार लाख ..देना है तो बोलो साहेब नहीं तो ..” कमला निर्णयात्मक स्वर में बोलते हुए उठ खड़ी हुई
“अरे बैठो बैठो ..मैंने भला अभय और शेखर में कोई फर्क समझा है क्या ..जैसी तुम्हारी मर्जी चार लाख फाइनल ..” उसके स्वर में खिसियाहट झलक रही थी
“पूरा एडवांस ..अभी का अभी ” कमला हथेली दिखाती हुई बोली
उसकी मांग मान ली गई थी | चमड़े के बैग में चार लाख रुपये लिये वो टैक्सी से घर जा रही थी | शेखर के मना करने का कोई कारण नहीं था | हालाँकि सच में ही गुप्ता जी के लड़के के खून से उसकी और शेखर दोनों के खून की जाँच हुई थी लेकिन दोनों का ही खून का सही मिलान नहीं हुआ था | पर उस घटना का उपयोग यह हुआ था कि मुआवजा चार गुना बढ़ गया था | सौदा फायदे का हुआ था पर उसकी आँखों के आंसू थे कि इस फायदे को समझ ही नहीं पा रहे थे |

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